MAHADEV KI KRIPA। महादेव और भक्त की कहानी

अमर नाथ से जुड़े  बहुत  सारे अलौकिक कहानी हम सुने हैं मगर ये कहानी अभी हाल ही में घटी है। ऐसी कहानी जो बिल्कुल सच है ।

गुजरात का रहने वाला एक लड़का जिसका नाम अनिल है ,  उसने ये कहानी लिखा है। वे लिखते हैं कि वह अपने पिता के साथ गुजरात में रहता है।उसके पिता श्री सुरेन्द्र जी महादेव के भक्त हैं। अनिल लिखते है कि उनके पिता को काफी उम्र हो चुकी थी।उनका अमर नाथ जाने की प्रबल इच्छा थी। 
सुरेन्द्र जी बेटे अनिल को अक्सर ही अमर नाथ दर्शन करने की ईच्छा के बारे में बोलते रहते थे। अनिल को किसी भी हाल में छुट्टी नहीं  पा रही थी। उसे भी इस बात का दुख था। पिता के उम्र को देखते हुए उन्हें अकेले भेजना भी उचित नहीं था।

सआपने पिता के आग्रह को देख कर अनिल कुछ  पैसों का बंदोबस्त किया और फिर मज़बूरी में भी अमर नाथ जाने वाले एक बस में पिता को  बैठा दिया। पिता ने क अपने बेटे से दुखी मन लिए कहा “बेटा मैं अकेले ही महादेव के दर्शन कर आता हूं, तुम बाद में कभी चले जाना।”अनिल बस ड्राइवर को तथा बस के अन्य सदस्य से भी अनुरोध किया, उसके पिता का खयाल रखने के लिए। समय पर पहुंच ने के बाद सुरेन्द्र जी ने अनिल से बात की,और अपने पहुंच जाने की सूचना दि।

अमर नाथ दर्शन हो जाने के बाद  सुरेन्द् जी ने बेटे को फोन कर के खुशी से सारी बातें बताई। अनिल को भी खुशी मिली की आखिर उसके पिता को अमर नाथ दर्शन हो गया।सभी लोग वापस आने वाले थे कि अचानक कोराना के लिए २१ दिनों की लॉक डॉउन  का  एलान कर दिया गया था। सारे यात्री इधर उधर हो गए, सुरेन्द्र जी अकेले पड़  गए। उनके पास पैसा भी ज्यादा नहीं था।फोन को चार्ज करना भूल गए, वें बड़े परेशान हो गए।इधर अनिल भी परेशान था कि उसके पिता कहां है ,कैसे है। वह पागल सा हो गया,पुलिस को फोन किया उसके दोस्तों को फोन किया मगर कुछ बात नहीं बनी।
सुरेन्द्र जी एक मकान देखें,उन्होंने मकान मालिक को सारी बातें बताए।मकान मालिक कुछ देर आराम करने का आग्रह किया पर कहा कि बाबा आप २/४ घंटे रहकर  अपने आगे की ओर चले जाना।
थके हारे सुरेन्द् जी वहीं  बैठ गए और सोचने लगे कि अब क्या होगा। उनके मन में बार बार एक ही बात आ रहा था कि मै तो महादेव की दर्शन करने आए,फिर  ये क्या हुआ।२१ दिनों की लॉक डॉउन काफ़ी लंबी होती है।वे घबरा गए और फिर महादेव को स्मरण करने लगे।बोले महादेव अब जो करेंग आप ही करेगे।

मन में सिर्फ महादेव को स्मरण कर रहे थे।३ घंटे के बाद मकान मालिक आकर बोले बाबा एक आदमी बाहर गाड़ी में बैठे हैं और आपके बारे में पूछ रहे हैं।सुनेंद्र जी को देख कर उसने बोला की बाबा मुझे आपका बेटा अनिल ने भेजा है आप को लेे जाने के लिए। मै उसका दोस्त हूं।
सुरेन्द्र जी खुश हो गए अपने बेटे की इस काम से।फिर उस आदमी उनको लेकर गुजरात के लिए रवाना हो गया। उसके पास हर राज्य से गुजरने की पास था। बिना रुके  वे सीधा गुजरात पहुंच गए।घर के सामने आते ही उस आदमी के पास एक फोन आया।उसने बोला बाबा आपको यहां से अकेले ही जाना पड़ेगा।मुझे एक जरूरी काम से जाना है।सुरेन्द्र जी बोले ठीक है बेटा यहां तक मुझे ले कर आए हो इतना ही बहुत है। खुश रहना बेटा।यह कहकर उसने अपने घर आ गए।अनिल पिता को देखकर चौंक गया,इस हालत में उसके पिता घर  कैसे आ गए। पिता से सारे बात सुनकर वे बोला की उसने तो कोई दोस्त को नहीं भेजा।न ही पुलिस या किसी से संपर्क कर पाया।
पिता पुत्र दोनों के आखों में आशुं आ गया।वे समझ गए कि  स्वयं महादेव ही भेश बदल कर आए और उनका मदद किए।आज भी हम इसी तरह महादेव की अलौकिक शक्तियों को सुन रहे हैं।

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