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एक बार एक राजा ने अपने राज्य में  प्रचार करवाया कि जिस जिस के घर में पत्नी का राज चलता है वे दरबार में आकर एक सेव लेे जाएं।और जिस के घर पति का राज चलता है वह एक घोड़ा लेे जाएं।

शाम होते होते लगभग सभी लोग आकर सेव लेे गए।राजा को बहुत आश्चर्य लगा कि ,क्या उनके राज्य में एक भी ऐसा इंसान नहीं है जिसके घर में उसका राज हो।

कुछ ही देर बाद एक आदमी आए जिसके मोटे मोटे मुछे थे। अपना ऊंचे कद चौड़े सीने को दिखा कर बोला “महाराज मेरे घर में मेरा ही राज चलता।”राजा खुश हो गए की कोई तो है जो अपना घर पर राज करता हो।राजा ने कहा “मेरे अस्तबल में जाओ और सोज अच्छा कला रंग के घोड़े को लेे जाओ।”

करीब एक घंटे के बाद उस आदमी आया और बोला म”मै घर गया तो मेरी पत्नी मुझे डांट ने लगी, की मैने  काला रंग का घोड़ा क्यों लिए।उसने कहा कि आप मुझे सफेद घोड़ा दे दीजिए वह शांति का प्रतीक है।”
महाराज गुस्से से तिलमिला के बोला “तुम घोड़ा रखो और सेव लेे जाओ।”

रात को राजा के मंत्री भागे भागे आया और बोला “महाराज आप सेव के बदले अग्र सभी को सब्ज़ी अनाज देते तो लोग कुछ दिनों तक उसे खा सकता था।”
राजा बोले “मैने भी यही बात सोची थी।मगर बड़ी रानी बोली सेव देने को।”मंत्री ने हस्ट हुए पूछा “तो क्या महाराज आप को भी एक सेव काट दुं”।

राजा ने कहा  “मंत्री तुम ये बात मुझे सुबह सभा में भी तो बोल सकते थे, इतनी रात को तुम्हे आने की क्या ज़रूरत थी।”
मंत्री ने कहा “महाराज  मैं घर पर आराम कर था,मगर मेरी पत्नी आग्रह करने लगी कि मै अभी आकर आपसे इस बात का जवाब जान लूं।”

फिर क्या,महाराज ने हस कर कहा “तुम्हे भी एक सेव काट दूं, या सेव तुम्हारा घर भेज दूं।”

अब आप सब तो जान ही गए होंगे कि इस कहानी का शार क्या है।
संगृहीत।

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